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चंद्रयान-3 : चांद की जगह धरती के चक्कर काटने लगा चंद्रयान, जाने वजह

 


14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने के बाद अपना चंद्रयान-3 अभी धरती की कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। आपने इसरो से जारी वो तस्वीर भी शायद देखी हो जिससे पता चलता है कि चंद्रयान धरती की परिक्रमा करते हुए पांच बार कक्षाएं बदलेगा। सरल भाषा में कहें तो पांच बार अलग-अलग रास्ते पर चलते हुए धरती के चक्कर लगाएगा। अगर आप नासा के मून मिशन पर नजर दौड़ाएंगे तो पता चलता है कि धरती से चांद की दूरी तो 3-4 दिन में ही पूरी की जा सकती है तो अपना यान धरती के चक्कर क्यों लगा रहा है?

ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते की दूरी तय करने में अपना यान 40-42 दिन क्यों ले रहा है? इसका जवाब रोचक है। साथ ही यह भी बताता है कि भारतीय तकनीक कैसे कम पैसे में दुनिया के ताकतवर देशों को चुनौती दे रही है। जी हां, चंद्रयान-3 का बजट आदिपुरुष फिल्म के बजट से भी कम है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि धरती के चारों तरफ यान को घुमाया क्यों जा रहा है?

धरती की स्पीड से दौड जाता है चंद्रयान 

अब बारीक बात समझिए। चंद्रयान में ईंधन की मात्रा सीमित होती है। उसे सीधे चांद पर भेजेंगे तो सारा ईंधन खर्च हो जाएगा। इसके बजाय उसे धरती की परिक्रमा करने के लिए छोड़ा जाता है। इस दौरान ईंधन का इस्तेमाल काफी कम होता है। आगे की प्रक्रिया सरल भाषा में समझिए तो यान को धरती की स्पीड और ग्रैविटी की मदद से आगे उछाला जाता है। वैसे ही, जैसे हम चलती बस से उतरते समय आगे की दिशा में दौड़ जाते हैं। धरती जिस तेजी से अपनी धुरी पर घूमती है उसका फायदा चंद्रयान को मिलता है। धीरे-धीरे चंद्रयान अपनी कक्षा बदलता जाता है। इस तरह से देखिए तो 5 कक्षाएं बदलने में वक्त तो लगेगा ही। 18 जुलाई सुबह 11 बजे तक के अपडेट के अनुसार यान तीसरी कक्षा की तरफ जाने वाला है।


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